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सिर्फ एक मिनट का ग़ुस्सा आपकी पूरी ज़िंदगी की दिशा बदल सकता है। यह भरोसे को तोड़ सकता है, रिश्तों को कमजोर कर सकता है और ऐसी चोटें दे सकता है जिन्हें भरने में कई साल लग जाते हैं। इस प्रभावशाली और व्यावहारिक पुस्तक में, रणजोत सिंह चहल बताते हैं कि अचानक भड़क उठने वाला एक मिनट का ग़ुस्सा वास्तव में कितने गहरे परिणाम ला सकता है—जिन्हें हम अक्सर समझ भी नहीं पाते।
जीवन से जुड़े आसान उदाहरणों और सरल मनोविज्ञान के माध्यम से यह पुस्तक समझाती है कि एक मिनट के ग़ुस्से के दौरान हमारे मन में वास्तव में क्या होता है। इससे भी महत्वपूर्ण, यह आपको ऐसे स्पष्ट और व्यावहारिक तरीक़े देती है, जो ग़ुस्से को काबू करने से पहले ही रोकने में मदद करते हैं। इन सरल तकनीकों की मदद से आप सीखेंगे कि भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को कैसे धीमा करें, अपने ट्रिगर्स को कैसे पहचानें, और तनावपूर्ण स्थितियों में भी शांति कैसे चुनें।
“ज़िंदगी में 1 मिनट का ग़ुस्सा” उन सभी के लिए मार्गदर्शिका है जो अपने मानसिक संतुलन की रक्षा करना चाहते हैं, अपने रिश्तों को बेहतर बनाना चाहते हैं और अपनी भावनाओं पर नियंत्रण पाना चाहते हैं। रणजोत सिंह चहल के मार्गदर्शन में आप जानेंगे कि असली ताक़त ग़ुस्से में नहीं, बल्कि उसे रोकने और उससे ऊपर उठने की क्षमता में है।