राधावल्लभ सम्प्रदाय एवं संगीत (Rādhāvallabha Sampradāya Evaṃ Saṃgīta)

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Beskrivning

"राधावल्लभ सम्प्रदाय एवं संगीत'''' पुस्तक में ब्रज में विकसित राधावल्लभ सम्प्रदाय में हित जी की श्री लाडिलीलाल के प्रति द्विव्य प्रेम तथा श्री राधा के रूप माधुर्य के दिव्य वर्णन को ''समाज गान'' के रूप में शास्त्रीय संगीत की दिव्य रसधार से ओतप्रोत पाया जाता है।इस पुस्तक में धर्म सम्प्रदाय को बताते हुए सम्प्रदायों के क्रमिक विकास, चतुः सम्प्रदायों से प्रेरित नवीन सम्प्रदाय, राधावल्लभ सम्प्रदाय के उद्भव के समय विभिन्न परिस्थितियों को बताया गया है। सम्प्रदाय का स्वरूप सिद्धान्त व साहित्यिक भावभूमि पर भी प्रकाश डालने का प्रयत्न किया गया है। प्रस्तुत पुस्तक के अंतिम अध्यायों में वर्तमान में अप्रचलित हो रही ''समाज संगीत पद्धति'' को स्वर लिपि के माध्यम से प्रस्तुत पुस्तक में लेखिका ने भविष्य के लिए सरंक्षित करने का प्रयास किया है।

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