गया (Gaya Pandey) पाणडय – författare
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प्रस्तुत पुस्तक भारतीय जनजातीय संस्कृति के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालती है। भारतीय जनजातियों की विशेषताएं और उनका वर्गीकरण पेश करने के अलावा, उनकी प्राचीनता, उनकी तुलनात्मक स्थिति, उनके राज्यानुसार वितरण, सामाजिक संगठन, राजनीतिक जीवन, धार्मिक जीवन, व्यवसाय, जीवन चक्र व व्यक्तित्व संरचना, लोक साहित्य, कला एवं कारीगरी, ग्राम्य जीवन, मातृवंशीयता, बहुपति प्रथा और जनजातीय जीवन की परिवर्तन प्रक्रियाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। इस पुस्तक में जनजातीय विकास, अस्मिता की समस्या, जनजातीय आंदोलनों और जनजातीय जीवन में जंगलों के महत्व की भी चर्चा की गई है। यह पुस्तक यू.जी.सी. द्वारा मान्य विश्वव्यापी पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसलिए यह मानवशास्त्र के स्नातक तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और अध्यापकों के लिए अति उपयोगी है।
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प्रस्तुत पुस्तक भारतीय मानवशास्त्र के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती है। भारतीय मानवशास्त्र की उत्पत्ति एवं विकास की जानकारी देने के साथ-साथ भारतीय तथा विदेशी मानवशास्त्रियों के योगदान को रेखांकित किया गया है। भारतीय समाज, संस्कृति एवं सभ्यता का ऐतिहासिक, विद्याशास्त्रीय व मानवशास्त्रीय दृष्टिकोण पेश करने के अलावा इस पुस्तक में वर्ण व्यवस्था, आश्रम व्यवस्था, पुरुषार्थ व्यवस्था, कर्म एवं पुनर्जन्म की अवधारणा, ऋण की अवधारणा, जाति व्यवस्था, जजमानी व्यवस्था, संस्कार, हिन्दू विवाह व्यवस्था, धर्म की अवधारणा, भारतीय समाज की विविधता एवं एकता, नारी की स्थिति, विभिन्न धर्मों, सामाजिक परिवर्तन, ग्राम्य जीवन की विशेषता और अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों की समस्याओं एवं संवैधानिक सुरक्षाओं का विस्तृत विवरण पेश किया गया है।