अब समाज की विविध विषमताओं को समझने तथा उनके समाधान की खोज के लिए सामाजिक मनोविज्ञान का अध्ययन विशेष महत्त्व का हो गया है। इस पुस्तक में यह स्पष्ट करने की चेष्टा की गई है कि हमारी सामाजिक समस्याओं की उत्पत्ति में कौन कौन से कारक प्रमुख भूमिकाएं अदा करते हैं। ये कारक शताब्दियों से मानव मन को कुरेदते रहे हैं। इन कारकों की ओर इस पुस्तक में स्पष्ट संकेत किया गया है। पुस्तक की इस विशिष्टता के कारण इस रचना का महत्त्व बहुत बढ़ गया है। स्नातक तथा स्नातकोत्तर कक्षाओं में पढ़ाये जाने वाले “सामाजिक मनोविज्ञान” के पाठ्यक्रम के अनुसार इस पुस्तक की रचना की गई है। ऐसी आशा है कि इन कक्षाओं के लिए यह रचना बहुत ही उपयोगी होगी।