यह पुस्तक किशोर मनोविज्ञान के मूल तत्वों की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करती है। किशोरावस्था को परिभाषित करने के अलावा यह उनमें आने वाले शारीरिक परिवर्तनों एवं उनके मनोवैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डालती है। इस पुस्तक में किशारों में संवेगात्मक व्यवहार, उनकी व्यक्तिगत एवं सामाजिक रुचियों, मनोरंजन संबंधी रुचियों, काम-संबंधी भावनाओं, उनमें सामाजिक व्यवहार, धार्मिक जागृति, नैतिकता, उनकी अपेक्षाओं एवं निदेशन का विस्तार से वर्णन किया गया है। नवविवाहित किशोरों की कठिनाइयों की भी चर्चा की गई है। यह पुस्तक मनोविज्ञान के स्नातक, परास्नातक, बी.एड. तथा एम.एड. के विद्यार्थियों और समस्त माता-पिताओं के लिए बहुत उपयोगी है।